वोल्केनो के फटने का वकत आ गया है।
कोई दरखत अगर खुम्ब से शुरू हो कर बहुत बड़ा दरखत हो कर सूर्या बनने के ख्वाब देखे तो इससे बड़ी मूर्खता कोई नहीं है। बुद्धिमता तो इसी में थी की खुम्ब से ही जमीन पर घास की तरह फैल जाता तो सूरज नीचे उतरा ही हुआ था। दरखत तो जितना ऊपर को बड़ा होता जाएगा सूरज का विरोध ही करता जाएगा और अँधेरा फैलता जाएगा ।
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