सचाई।
हर अंश अपने अंश में मिल जाएगा ,
ना कुछ खोएगा,ना कुछ पाएगा।
माटी का माटी में,पानी का पानी में,
हवा का हवा में,और शक्ति का शक्ति [एनर्जी] में।
जीवन एक इन अंशों का मिल कर खेला है,
आनंद मना लो जीवन दो चार दिनों का मेला है।
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