साधु रे।
साधु रे ,तू स्वासों का धुआं है रे ,
जो अपने फेफड़ों की चिमनी से, नाक से बाहर निकलता हुआ धुंआ है रे।
तू अपने पेट के चुहलें में, अपने भोजन की ऑक्सीडेशन[जलन] का नतीजा है रे,
कब इस ऑक्सीडेशन को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो जाएगी, कुछ पता नहीं है रे।
तेरा भोजन और ऑक्सीजन ही तेरा सभ से पहला भगवान है रे,
जीने के लिए ,जिसे पाना तेरा सभ से पहला कर्त्तव्य है रे।
कियूं धरम और जाती के फजूल चक्रों में उलझा हुआ है रे,
यह दरखत, ख़ास करके पीपल,नीम और बोहड़ तुझे भरपूर ऑ
क्सीजन दे रहे हैं ,इन्हीं सारे दरख्तों,पौदे,बुश,और हर्बल और खेती की हरयाली को [३३ करोड़] जीवन देने वाले देवता कहा गया है रे।
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