Friday, May 28, 2021

JAL VAYU [ATMOSPHERE].

जल वायु [अट्मॉस्फेर]। 

जल वायु [अट्मॉस्फेर] ही हम जीवों का मन है,इस का डिस्टर्ब होना ही हमारी सेहत का बिगड़ना है और इस का शांत रहना और स्थिर रहना  ही हमारी सेहत है। इस को निरंतर हिलने से यह डिस्टर्ब  होता है और इस को डिस्टर्ब न करने से यह शांत होता है। कई लोग इस धरती पर अपनी प्रसिद्धि के लिए और अपना धंदा चमकाने के लिए,कुदरत के विज्ञान को ना समझते हुए  तरह तरह के पाखण्ड करते रहते हैं जैसे कि योगिक एक्सेसिसेज,लाठी चलाओ एक्सेरसीसेज और डांस एक्सेरसीसेज वगैरा और दुसरे जल और वायु को गन्दा करना । आराम से बैठना या लेटना ही जल वायु, कुदरत या मन को शांत करने के लिए ही, योगा या मैडिटेशन होता है,और पोल्लुशण को कम करना होता है  न कि उछल कूद। महात्मा बुध ने इसी विज्ञानं का लोगों को वैज्ञानिक सिद्ध सन्देशऔर वैज्ञानिक लेसन  दिया है,तुम ही अपने दुःख और सुख का कारन हो,कुदरत को डिस्टर्ब करने वाले और शांत करने वाले भी तुम ही  हो। यह परम आत्मा,या कुदरत  का बहुत बड़ा सीक्रेट सिद्ध वैज्ञानिक सिद्धांत  है। 

  

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