मुक्ति।
संघ प्रमुख मोहन भगवत के बयान के मुताबिक, अगर हिन्दू धरम में, मृत्यु ही मुक्ति का मार्ग है तो उसको भी कोई मुक्ति प्रदान करादे,बहुत पुनिया होगा। बाकी साइंटिफिक धर्मों के मुताबिक जीते जी अपने मन को शोध कर ,दुखों से मुकत हो जाना ही मुक्ति है,जिस के परिणाम से सोशलिज्म/कम्युनिज्म का आविष्कार हुआ है,जिस में सभी जनता को, सरकार दवारा सुखी रखने की जुमेवारी ली जाती है । आरएसएस और बीजेपी,हिन्दू राष्ट्र के बदले में , इसी लिए, कॉर्पोरेट्स के हाथ में, सारी देश की इकॉनमी सौंपने के हक़ में हैं।
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