में कौन हूँ ? एक बुझारत।
में कौन हूँ ? तुम धरती और पानी का अँधेरा हो ,
में जब भी तुम्हें रोशन करता हूँ,अनेक रंगों के फूल खिलते हैं,फल लगते हैं,बहारें आती हैं और हर तरह के आनंद होते हैं।
में नहीं तो तुम भी नहीं,मेरे बिन यहां कुछ भी नही।
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