अधियात्मिक साइंस।
=जो ब्रहमांडे सोइ पिण्डे।
अर्थ जो बाहर में होता है वैसे ही हमारे अंदर में भी होता है।
=मिटी धुंद जग चानन होया ,नानक [चानन,रौशनी ] परगटिया।
अर्थ जैसे बाहर सर्दियों की मौसम में धुंद का अँधेरा होने से कुछ नजर नहीं आता,जब धुंद मिट जाती है रौशनी हो जाती है,ऐसे ही हमारे अंदर भी जो मन की धुंद और धुआं है जिस को हम एमोशन्ज कहते हैं , जब मिट जाते हैं तो हमारी दृष्टि,चेतना ,विज़न,अवेयरनेस या इंटेलिजेंस जो रौशनी की तरह ही है तेज हो जाती है और निखर जाती है । इसी मन की धुंद व् धुएं को अंदर से मुकत या साफ़ करने के लिए हमारे गियानियों, ऋषियों और पतांजलि,बुध और नानक जैसे विज्ञानियों ने हमें विपासना, प्राणायाम ,डीप ब्रीदिंग,सिमरिन,पाठ,योग,मैडिटेशन जैसी अनेक विधियां दी हैं।
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