नरक और स्वर्ग ।
नरक और सवरग दोनों अवस्थाएं हमारे शरीर के अंदर ही हैं । हमारे पेट से नीचे अंतड़ियों में मल यानि नरक है और हमारा दिमाग स्वर्ग यानि सव रग है। बाहर कहीं भी नरक और स्वर्ग नहीं है। आत्मा, परम आत्मा और नरक,स्वर्ग की बातें ब्राह्मणों ने लोगों को अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए ,भरमाने ,उलझाने और मूरख बनाने के लिए बनाए हुए हैं।
नरक और सवरग दोनों अवस्थाएं हमारे शरीर के अंदर ही हैं । हमारे पेट से नीचे अंतड़ियों में मल यानि नरक है और हमारा दिमाग स्वर्ग यानि सव रग है। बाहर कहीं भी नरक और स्वर्ग नहीं है। आत्मा, परम आत्मा और नरक,स्वर्ग की बातें ब्राह्मणों ने लोगों को अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए ,भरमाने ,उलझाने और मूरख बनाने के लिए बनाए हुए हैं।
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