मोदी जी ,
मोदी जी ,तुम शब्दों के धनि हो ,शब्दों का जाल बिछाना बंद करो,
भारत की वास्विकता और इस की सचाई को पहचानना शुरू करो ।
तुम हमेशा लगे रहते हो अपने पूँजीपति,मालकों की सेवा में,
नीचे उतर कर कभी गरीब,मजदूर और किसानों की सुनो ।
तुम हमेशा लगे रहते हो पैसे और पॉलिटिक्स की हेरा फेरी के चक्रों में ,
भारत की इकॉनमी को और गंदे सिस्टम को सुधारने की भी कभी कोशिश करो।
मोदी जी ,तुम शब्दों के धनि हो ,शब्दों का जाल बिछाना बंद करो,
भारत की वास्विकता और इस की सचाई को पहचानना शुरू करो ।
तुम हमेशा लगे रहते हो अपने पूँजीपति,मालकों की सेवा में,
नीचे उतर कर कभी गरीब,मजदूर और किसानों की सुनो ।
तुम हमेशा लगे रहते हो पैसे और पॉलिटिक्स की हेरा फेरी के चक्रों में ,
भारत की इकॉनमी को और गंदे सिस्टम को सुधारने की भी कभी कोशिश करो।
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