भारत की दुर्दशा का कारण।
भारत में आज जिन लोगों का राज है उन को बहुत शातिर कौम होने के नाते ,यूरेशियन ब्राह्मण कहते हैं जो की भारत जान संख्या का ३-४ % हैं और ब्राह्मण,क्षत्रिय और वेश मिलकर सिर्फ १५ % है। विडंबना तो एहि है कि यह १५ % जातियां ही बाकी ८५ % मूल निवासिओं जिन में एस सी ,एस टी ,ओ बी सी ,और अलाप संख्याक सिख,मुस्लिम,बोध,जैन और लिंगायक आते हैं,सत्ता पर काबिज हैं । जियादातर मूलनिवासी संगठित न होने के कारण से कमजोर हैं किउंकि इन के जियादा तर लीडर क्रांतिकारी न हो कर,सदियों से गुलाम रहने की वजह से, डरे हुए हैं और भाषणों के सहारे और इतिहास को बता कर अपना टाइम बिता रहे हैं और अपनी जायदादें बनाने में लगे हुए हैं।
भारत में आज जिन लोगों का राज है उन को बहुत शातिर कौम होने के नाते ,यूरेशियन ब्राह्मण कहते हैं जो की भारत जान संख्या का ३-४ % हैं और ब्राह्मण,क्षत्रिय और वेश मिलकर सिर्फ १५ % है। विडंबना तो एहि है कि यह १५ % जातियां ही बाकी ८५ % मूल निवासिओं जिन में एस सी ,एस टी ,ओ बी सी ,और अलाप संख्याक सिख,मुस्लिम,बोध,जैन और लिंगायक आते हैं,सत्ता पर काबिज हैं । जियादातर मूलनिवासी संगठित न होने के कारण से कमजोर हैं किउंकि इन के जियादा तर लीडर क्रांतिकारी न हो कर,सदियों से गुलाम रहने की वजह से, डरे हुए हैं और भाषणों के सहारे और इतिहास को बता कर अपना टाइम बिता रहे हैं और अपनी जायदादें बनाने में लगे हुए हैं।
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