हवा और पानी
यह हवा और पानी ,बनते हैं मेरी वाणी ,
जिसने भी इन को जाना ,जीवन का भेद जाना ।
जिसने भी इन का किया धियान,
उस ने पाया प्रकृति का स्वर गियान ।
इन दोनों से ही चलता है जीवन का सिलसिला ,
यही गुरु मंतर हैं धरम और अधयातम का फलसफा।
इनके ऊपर है भगवन सूर्य की रौशनी चमकती ,
जो हम सभ को दिखावे और समझावे हमारी दृष्टि से, सारी प्रकृति ।
यह हवा और पानी ,बनते हैं मेरी वाणी ,
जिसने भी इन को जाना ,जीवन का भेद जाना ।
जिसने भी इन का किया धियान,
उस ने पाया प्रकृति का स्वर गियान ।
इन दोनों से ही चलता है जीवन का सिलसिला ,
यही गुरु मंतर हैं धरम और अधयातम का फलसफा।
इनके ऊपर है भगवन सूर्य की रौशनी चमकती ,
जो हम सभ को दिखावे और समझावे हमारी दृष्टि से, सारी प्रकृति ।
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