Saturday, May 23, 2020

भगवान्  के अंग मेरे जीवन के संग।
यह सूर्य की धुप,यह हवा,यह पानी मेरी शरीर की जमीन को गीला रखते हैं ,पानी को उड़ाते हैं भाव या भाफ बनाते हैं। हवा और  भावों का आना जाना लगा रहता है और मेरा जीवन का आँगन लहराता रहता है। ना जाने कब यह हवा और भावों का आना जाना रुक जाएगा और यह मेरे जीवन का लहराना भी बंद  हो जाएगा। जीवन भी किया पहेली है ?किया मज़ाक है जिस का जीवन को आगे कंटिन्यू रखने के और कोई भी प्रयोजन नहीं है।

 



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