विज्ञानं [साइंस ] ही परम आत्मा का सच्चा गियान है।
सारी एक्सिस्टेंस के काम करने के नियमों को जानना और समझना ही परम आत्मा को जानना है, जिन को जान कर मनुष्य भी इंसान बन जाता है और उसी परमआत्मा का रूप बन जाता है।
धर्मों के ग्रन्थ भी साइंस के आने से पहले के, एक्सिस्टेंस [कुदरत] के नियमों को जानने और समझने की कोशिशों की किताबें हैं जिन की अब साइंस के आने के बाद जरूरत नहीं है और इन सभी ग्रंथों को साइंस [विज्ञानं] की किताबों से बदलने की जरूरत है जो कि एक परमआत्मा का सच्चा गियान है।
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