Monday, May 3, 2021

SOCIALISM/COMMUNISM.

 सोशलिज्म/कम्युनिज्म।  

ओ भोले इंसान,

कियूं गफलत में है गलतान। 

तेरा भगवन तेरे नाक के दवार पर हाजिर है,

तू कहाँ कहाँ उसको ढूंढ़ता भटक रहा है ?

इस भगवन को अपने अंदर फेफड़ों में ले जा,जैसे तू हमेशा कर ही RAHA  है ,

और फिर अपने खून में मिला कर अपने सारे सेलों को दे कर जीवंत कर दे और खुश कर दे ।

अपने सारे सेलों के जीवन की रक्षा करना और इन्हें खुश रखना ही तो इनके तुम राजा का  फ़रज़ है [ कियुँकि हमारे शरीर के सारे सेल ही तो हम राजा की परजा सरूप हैं]

ऐसे फरज को निभाने वाले राजा की सरकार का नाम  ही तो सोशलिज्म/क्म्मुनिस्म है,जो खालिस लोगों की पार्टी  का सिस्टम है। 

परोपकारी और क्रांतिकारी सत गुरु नानक,कबीर और रविदास जैसे संतों का भी तो यही सन्देश है,

एक नूर से सभ जग उपजिया  कौन भले कौन मंदे,ना कोई जात पात,ना कोई धरम  की निगाह से छोटा और बड़ा या गरीब और अमीर,सभ को मिले रोज़गार और ख़ुशी जीवन  । । । 

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