परम आत्मा।
जिस हवा के सागर से हम अपने नाक दवारों से अपना स्वास लेते हैं ,और मृत्यु के बाद यह स्वास वापिस उसी सागर में मिल जाता है उसी सागर का नाम परम आत्मा है।
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