में अट्मॉस्फेर [आत्मा] हूँ।
में अट्मॉस्फेर [आत्मा] हूँ ,स्वास के द्वारा शरीर में आता रहता हूँ,
सभी सेलों को खून द्वारा, जीवत करता हुआ,रोमों से बाहर निकल जाता हूँ।
बचा खुचा कार्बन डाइऑक्साइड [धुएं-मन ] को ले कर, नाक से बाहर निकल जाता हूँ,
ऐसे ही में मल मूतर के त्याग के साथ अपने अंदर की शुद्धि करता रहता हूँ और नित नया जीवन पाता रहता हूँ।
इस स्वास के आने और जाने और ब्लड सर्कुलेशन से जीवन का किरिया करम करता रहता हूँ ,
अपने शरीर की मशीन का धियान के जरिये खियाल रखता हूँ और हर सेल [प्राणी] को खुश रखता हूँ।
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