मेरे शरीर का घर।
मेरे शरीर के घर में रहते हैं ,
अन्न ,पानी और हवा के किराएदार।
रौशनी दिखाए इनको ,
इस जगत के सिलसिले का कारोबार।
अन्न,पानी हवा की शक्ति और मेरा मतषक,
विचार करे,कल्पना करे और समझाए ,
मुझे जीवन का फलसफा।
ना कुछ लेके आए थे,
ना कुछ लेके जाना है,
जीवन पूरा होने पर, इस जगत से चले जाना है।
एक सपना सा है यह सारी जिंदगी,
अंत में अन्न,पानी और हवा ने भी अपने स्रोत में मिल जाना है।
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