किसी भी देश का मैकेनिज्म ।
किसान,मजदूर ,बोपारी,कर्मचारी और इंडस्ट्रियलिस्ट किसी भी देश की मशीनरी के अहम् पुरजे होते हैं जिनके बगैर देश नहीं चल सकता है। इन में से कोई भी कम या जयादा अहमियत नहीं रखता है। एजुकेशन और ट्रेनिंग इन सभ की शक्ति होती है। भारत के प्रधान मंत्री का रुझान सिर्फ उनके गुजरती दोस्त इंडस्ट्रियलिस्ट अम्बानी और अडानी की तरफ ही लगा रहता है चाहे बाकी सारी जनता का नाश कियूं न हो जाए। श्री नरिंदर मोदी जी ओ बी सी तो बिलकुल ही नहीं हैं ,यह तो मनुवादी ब्राह्मणों के संगठन आरएसएस के गुलाम हैं जो उन की विचारधारा को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध और कार्यरत हैं।
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