हम सभी इंसान हैं।
हम भारत में रहने वाले सभी भारतीय हैं और सभी इंसान हैं,धरम की मान्यताओं के हिसाब से हम अलग अलग असूलों पर चलने वाले हो सकते हैं पर हिन्दू तो बिलकुल भी नहीं हैं कियुँकि हिन्दू जैसा कोई भी शब्द कहीं नहीं है।भारत और भारतीयता के शब्दों को छोड़ कर हिन्दू और हिंदुत्व के शब्दों पर ही आरएसएस कियूं हमेशा जोर देती है ? इस के पीछे किया षड यंतर है ?
हम भारत में रहने वाले सभी भारतीय हैं और सभी इंसान हैं,धरम की मान्यताओं के हिसाब से हम अलग अलग असूलों पर चलने वाले हो सकते हैं पर हिन्दू तो बिलकुल भी नहीं हैं कियुँकि हिन्दू जैसा कोई भी शब्द कहीं नहीं है।भारत और भारतीयता के शब्दों को छोड़ कर हिन्दू और हिंदुत्व के शब्दों पर ही आरएसएस कियूं हमेशा जोर देती है ? इस के पीछे किया षड यंतर है ?
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