जीवन मैकेनिज्म।
जैसे मछली पानी या समुंदर में जीती है ,अगर इस को पानी या समुन्दर से निकाल लोगे तो यह मर जाएगी। ऐसे ही हम भी हवा या अट्मॉस्फेर जिसको आत्मा/परमात्मा भी कहते हैं,में रहते हैं , जब भी हमें किसी भी कारन, इस हवा या अटमॉफ़ेर से अलग कर दिया, जाएगा, हम भी मर जाएंगे। यह हवा यानि हमारी आत्मा, हम बाहर के अट्मॉस्फेर यानि परामात्मा से अपने नाक के दवारों से अपने अंदर स्वास के दवारा लेते हैं,और इस स्वास के किसी तरह से रुकने पर हम मर जाते हैं।
जैसे मछली पानी या समुंदर में जीती है ,अगर इस को पानी या समुन्दर से निकाल लोगे तो यह मर जाएगी। ऐसे ही हम भी हवा या अट्मॉस्फेर जिसको आत्मा/परमात्मा भी कहते हैं,में रहते हैं , जब भी हमें किसी भी कारन, इस हवा या अटमॉफ़ेर से अलग कर दिया, जाएगा, हम भी मर जाएंगे। यह हवा यानि हमारी आत्मा, हम बाहर के अट्मॉस्फेर यानि परामात्मा से अपने नाक के दवारों से अपने अंदर स्वास के दवारा लेते हैं,और इस स्वास के किसी तरह से रुकने पर हम मर जाते हैं।
No comments:
Post a Comment