जीवन दाता सूर्या।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी देता है,
भोजन देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।
अगर तू न होता तो जीवन भी न होता,
हर जगह धरती पर सिर्फ ग्लेशियर ही होता।
अगर तू न होता तो गर्मी न होती
ग्लेशियर ना ढलते तो पानी न होता।
यह पानी न होता तो नदियाँ न बहती,
नदियाँ न होतीं तो यह समुन्दर भी न होता।
समुन्दर के पानी की भाफ भी न बनती,
न बनते बादल और बारिश भी ना होती।
धरती पर कोई हरियाली भी ना होती ,
ना ही कोई जीवन की उत्पति होती।
तू ही धरती माता को रोशन करता है,गर्मी देता है,
भोजन देता है और सभी जीवों का जीवन चलता है।
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