मंदिर और भगवान् ।
मंदिर तो पृथ्वी या धरती का हिस्सा है,जैसे हमारा शरीर है,मगर इसमें रहने वाला भगवान् तो भोजन और ऑक्सीजन के मिलान से जल रही लोअ से पैदा हो रही गर्मी की शक्ति है,जिस के ठंडा पड़ने से शरीर निष्किरिया हो कर जमीन पर गिर जाता है और इसमें से गर्मी की शक्ति निकल जाती है जिस को गियानियों ने भगवान्,परमेशर,पमात्मा ,अल्लाह,खुदा,इश्वर ,वाहेगुरु,
प्रभु ,गॉड और कई और जबानों में अनंत नामों से पुकारा है ।
मंदिर तो पृथ्वी या धरती का हिस्सा है,जैसे हमारा शरीर है,मगर इसमें रहने वाला भगवान् तो भोजन और ऑक्सीजन के मिलान से जल रही लोअ से पैदा हो रही गर्मी की शक्ति है,जिस के ठंडा पड़ने से शरीर निष्किरिया हो कर जमीन पर गिर जाता है और इसमें से गर्मी की शक्ति निकल जाती है जिस को गियानियों ने भगवान्,परमेशर,पमात्मा ,अल्लाह,खुदा,इश्वर ,वाहेगुरु,
प्रभु ,गॉड और कई और जबानों में अनंत नामों से पुकारा है ।
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