यह दुनिया एक इंसानों के ड्रामे का मंच है ।
यह दुनिया एक कुदरत का रचा हुआ ड्रामा है जो धरती के मंच पर खेला जा रहा है । इस ड्रामे में हर वियक्ति अपना अपना निर्धारित किया हुआ रोल अदा कर रहा है ।अगर हम आज की भारत की स्तिथि पर नज़र डालें तो पता चलता है कि जालिम का रोल करने वाले बीजेपी के मोदी, अमित शाह और योगी भी इस ड्रामे के मशहूर एक्टर हैं ,जिन की अदाकारी के बगैर आज भारत में इंक़लाब का परिवर्तन नहीं आ सकता था ।अगर रावण ना होते तो राम की प्रशंशा कैसे होती ?अगर धृतराष्ट्र ना होते तो कृष्ण को कौन जनता ? अगर अँधेरा ना होता तो रौशनी की कदर ही किया होती ? यह नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों कुदरत के कार्यक्रम को चलानेवाले दो विरोधी अंश हैं ।
यह दुनिया एक कुदरत का रचा हुआ ड्रामा है जो धरती के मंच पर खेला जा रहा है । इस ड्रामे में हर वियक्ति अपना अपना निर्धारित किया हुआ रोल अदा कर रहा है ।अगर हम आज की भारत की स्तिथि पर नज़र डालें तो पता चलता है कि जालिम का रोल करने वाले बीजेपी के मोदी, अमित शाह और योगी भी इस ड्रामे के मशहूर एक्टर हैं ,जिन की अदाकारी के बगैर आज भारत में इंक़लाब का परिवर्तन नहीं आ सकता था ।अगर रावण ना होते तो राम की प्रशंशा कैसे होती ?अगर धृतराष्ट्र ना होते तो कृष्ण को कौन जनता ? अगर अँधेरा ना होता तो रौशनी की कदर ही किया होती ? यह नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों कुदरत के कार्यक्रम को चलानेवाले दो विरोधी अंश हैं ।
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