जालिम और मजलूम ।
जैसे जैसे जालिम जुलम बढ़ाता जाएगा ,
वैसे वैसे मजलूम के बर्दाश्त से बाहर होता जाएगा ।
यह हिंदुत्व राष्ट्र बनाना सिर्फ आरएसएस के जालिमों का विचार है,
बीजेपी आरएसएस की पोलिटिकल पार्टी है और पूंजीपति इनके मददगार हैं ।
मज़लूम वियक्ति कब तक जुलम सेह्ता जाएगा ?
हर जुलम की सीमाएं होती हैं अंत मैं तो इंक़लाब ही आएगा ।
हर मजलूम सभी धर्मों और जातियों के, एक साथ आएँगे,
और अपने जीवन की जरूरतों के लिए सीधे संघर्ष में आएँगे ।
जालिम और मजलूम ।
जैसे जैसे जालिम जुलम बढ़ाता जाएगा ,
वैसे वैसे मजलूम के बर्दाश्त से बाहर होता जाएगा ।
यह हिंदुत्व राष्ट्र बनाना सिर्फ आरएसएस के जालिमों का विचार है,
बीजेपी आरएसएस की पोलिटिकल पार्टी है और पूंजीपति इनके मददगार हैं ।
मज़लूम वियक्ति कब तक जुलम सेह्ता जाएगा ?
हर जुलम की सीमाएं होती हैं अंत मैं तो इंक़लाब ही आएगा ।
हर मजलूम सभी धर्मों और जातियों के, एक साथ आएँगे,
और अपने जीवन की जरूरतों के लिए सीधे संघर्ष में आएँगे ।
जैसे जैसे जालिम जुलम बढ़ाता जाएगा ,
वैसे वैसे मजलूम के बर्दाश्त से बाहर होता जाएगा ।
यह हिंदुत्व राष्ट्र बनाना सिर्फ आरएसएस के जालिमों का विचार है,
बीजेपी आरएसएस की पोलिटिकल पार्टी है और पूंजीपति इनके मददगार हैं ।
मज़लूम वियक्ति कब तक जुलम सेह्ता जाएगा ?
हर जुलम की सीमाएं होती हैं अंत मैं तो इंक़लाब ही आएगा ।
हर मजलूम सभी धर्मों और जातियों के, एक साथ आएँगे,
और अपने जीवन की जरूरतों के लिए सीधे संघर्ष में आएँगे ।
जालिम और मजलूम ।
जैसे जैसे जालिम जुलम बढ़ाता जाएगा ,
वैसे वैसे मजलूम के बर्दाश्त से बाहर होता जाएगा ।
यह हिंदुत्व राष्ट्र बनाना सिर्फ आरएसएस के जालिमों का विचार है,
बीजेपी आरएसएस की पोलिटिकल पार्टी है और पूंजीपति इनके मददगार हैं ।
मज़लूम वियक्ति कब तक जुलम सेह्ता जाएगा ?
हर जुलम की सीमाएं होती हैं अंत मैं तो इंक़लाब ही आएगा ।
हर मजलूम सभी धर्मों और जातियों के, एक साथ आएँगे,
और अपने जीवन की जरूरतों के लिए सीधे संघर्ष में आएँगे ।
No comments:
Post a Comment