में क्या हूँ ?
में तो एक मैसूस करने वाला मिटटी का ढेला हूँ या मेरे शरीर की अलग अलग इंदरियों वाला यंत्र हूँ । मेरा हर एक सेल हर एक मॉस का लोथड़ा मेरी गियान इन्द्रियों में रहने वाली अदृश्य शक्ति जैसे मेरे पैरों हाथों की सेंसेज,मेरे सेकरेशन और हाज़मे की शक्ति,मेरे सवास की शक्ति,मेरे सवाद लेने की शक्ति,सुनने की शक्ति,सूंघने की शक्ति,सुनने की शक्ति,देखने की शक्ति,और सोचने समझने की सकती सभ यह शक्ति बाहरी हवा और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वैवेज और फ्रीक्वेन्सीज की शक्ति है जो मरने के टाइम शरीर का साथ छोड़ जाती है । धरम या अधयातम का असली मकसद इस तरह तरह की महसूस करवाने वाली अदृश्य शक्ति को जानना और समझना होता है,जिसको पुराने लोगों ने आत्मा के नाम से पुकारा है, जैसे एक तो टीवी का शरीर जैसा यंत्र है और एक इस में एंटीना और बिजली द्वारा आ रही अदृश्य शक्ति है ।