पवन =गुरु =हवा =सवास=ऑक्सीजन ।
पवन गुरु का राज है सभनी थाईं,
कोई भी जगह है , गुरु बिन नाहीं।
पवन को ही, हवा कह कर बुलाया ,
सवासों का खेल है जीवन,कह समझाया।
बिन हवा के आग नहीं जलती,
आग के बगैर जीवन शक्ति- गर्मी नहीं बनती।
जियादा गर्मी/तमो गुना जाए और शीतलता/ सतोगुणा आए,
सहिजता/समता में ही आनंद का अनुभव करिया जाए।
इस हवा और पानी को दूषित करना ही इंसान का, सभ से बड़ा पाप है,
इस की दुषितता ही हमारे रोगों का और कुदरती बिपताओं का कारण है।
हवा ही हमें सवास दिलाए , हमारे बोल बन कर बाहर आए ,
हवा [ऑक्सीजन] ही हमारे नीले खून को लाल रंग दिलाए
धरम एक ख़ास शकल/पहरावा/संगठन नहीं ,कुदरत के गुणों/कानूनों का नाम है ,
धरम के नाम पर उल्लू बनाना और लड़ाना एक महँ मूर्खता का काम है।
जुलम और जबर के विरोध में जरूर लड़ना /इंक़लाबी होना चाहिए,
जुल्मों के खिलाफ लड़ना और शांति और प्रेम से रहना ही इंसान का धरम/ गुण होना चाहिए।
No comments:
Post a Comment