धरम।
धरम एक पहेली से जियादा कुछ भी नहीं है ,
जिस ने बूझ लिया उस के लिए सभ कुछ वही है ।
इस अंधी दुनिया में वहमों और अंधविश्वाशों के सिवा कुछ भी नहीं है ,
सभ कुछ हमारे इर्द गिरद है और हम उसको मंदिरों में ढूंढ रहे हैं।
धरम पुजारियों का धंदा बन कर रह गया है ,
धंदे के आगे इस दुनिया में प्रेम खो गया है।
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