तुम्हारे टैक्स के पैसे।
तुम्हारे टैक्स के पैसे को, तुम्हारे ही भले की वस्तुओं पर ही , खर्च करना सरकार का फर्ज होता है। किया तुम्हारी सरकार ऐसा कर रही है ? इसकी निगरानी रखना तुम्हारा ही फर्ज है।अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो ऐसी सरकार को बदलना और एक बेहतर सरकार को लाना भी तुम्हारा ही काम है,तभी तुम्हारा जीवन बेहतर हो सकता है ,नहीं तो नही।
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