में कहाँ छुपा हूँ ?
ना में मंदिर में,ना मैं मस्जिद में,ना में गुरुदवारे में ,ना में चर्च में ,
मूरख प्राणी,में तो तेरे ही सवसों में छुपा हूँ, में तो हूँ तेरे ठीक अंदर में।
बाहर से अंदर में जाता रहा और लोट कर आता रहा,
इतनी भी दृष्टि तेरे में नहीं,पर तू मुझे बाहर ढूंढ़ता रहा।
तेरे अंदर में,में आत्मा कहलाता हूँ ,
पर बाहर में विराट अट्मॉस्फेर- परम आत्मा कहलाता हूँ ।
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