हम और मैडिटेशन किया है ?
हम और मैडिटेशन कुदरत का जीता जागता अंश हैं। जब हमारे अंदर का पानी और हवा गरम हो कर, भाफ बन कर,हलकी हो कर, ऊपर आसमान को उड़ने लगते हैं,हमारे सिर में टेंशन और दर्द होने लगती है , तो इसे मन कहते हैं,और जब पानी और हवा,आराम करने से,रिलैक्स होने से,सोने से, ठंडी हो कर,भारी हो कर , नीचे को धरती की तरफ,बारिश की तरह,आने लगती है,गिरने लगती है और पिशाब की हाजत होने लगती है, तो इसे आत्मा कहते हैं और शांति कहते हैं।हमारे बाहर भी कुदरत में बारिश होने के BHI यही नियम हैं। इसी लिए नानक ने अपनी सुखसम दृष्टि से देखते हुए और परखने वाली समझ के जरिये समझते हुए,यह कहा था कि भाई जो ब्रम्हांड में है सोइ पिंड में है ।
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