भारत की सोशल लड़ाई।
भारत के हज़ारों सालों के सोशल स्ट्रक्चर पर मनुवादी,ब्राह्मणवादी ऊंची कास्टस ब्राह्मण,कशात्री और वेश का राज इस सी,इस टी और ओ बी सी पर चलता आया है। १९४७ के बाद भी अंग्रेजों से आज़ादी पाने के साथ यह राज ब्राह्मणों के हाथ में आ गया है, जो कि भारत की जन संख्या का सिर्फ ३-४ % ही है और यह सभी ब्राह्मण इनके डीएनए के मुताबिक विदेशों से आए हुए हैं । पंडित नेहरू जो खुद ब्राह्मण थे आज़ादी के बाद के प्रधान मंत्री थे, और उनहोंने उनकी पहली पार्लियामेंट में ६५ % लोग ब्राह्मण रखे थे। यहीं से आज़ाद भारत में ,सारे जातिया मत भेद का सिलसिला शुरू हुआ है जो आज तक चलता चला आ रहा है। जब तक इस सी,इस टी और ओ बी सी,मुसलम,सिख,ईसाई,लिंगायत वगैरा जो कि मिलके ८५% हैं और जो कि भारत के मूल निवासी हैं , एक साथ नहीं आएँगे और मनुवाद,ब्राह्मणवाद जो कि आरएसएस की आतंकवाद की छतर छाया में पल रहा है और सिर्फ जन संख्या का १५% है ,को शिकस्त नहीं देंगे और राज अपने हाथ में नहीं लेंगे ,इस सोशल इम्बैलेंस और ना इंसाफ़ी का कोई हल नहीं है।
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