हमारा जीवन।
हम मिटटी [सोएल ] से बने कणों के बने शरीर हैं,
जिस में ऑक्सीजन मिले खून का परवाह चल रिहा है।
पानी इसमें मन है ,जिस के गैस बनने को हम एमोशन्ज बोलते हैं,
हमारे भोजन में कार्बन के ऑक्सीडाइज होने को हम टोक्सिनज बोलते हैं।
पानी हमारे भोजन की खुश्की ख़तम करता है और अंदर की गर्मी को बैलेंस करता है ,
नाक से लिया हुआ हवा का स्वास हमारे भोजन पर प्रेशर बनाके नीचे की तरफ ले जाता है और मल बाहर निकल जाता है।
इस तरह भोजन हज़म हो करके कार्बोहाइड्रेट्स और काम करने की ह्यूमन शक्ति पैदा होती है।
मन की शांति के लिए, गैस बने मन या पानी और कार्बन डाइऑक्साइड से सर में टेंशन बने प्रेशर को नाक से या बोल कर बाहर निकालना जरूरी है,जिस को सिमरन भी कहा गया है या नीचे जमीन की तरफ ग्रॅविटेट करने की जतूरत है, जिस का नाम मैडिटेशन है।
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