सूर्य चेतना, पवन आत्मा ,पानी-मन पिता, धरती-भोजन माता का पर्यावरण।
जब मुस्लिमज के अल्लाह,सिखों के वाहेगुरु, ईसाईयों के गॉड और सनातनियों के भगवान् ही जीवन के लिए प्रियपत नहीं रहेंगे तो जीवन कहाँ रहेगा ? अगर अपने जीवन को सूंदर और सार्थिक बनाना है तो अंध विश्वाशों से हट कर ,साइंटिफिक सोच को अपनाना ही पड़ेगा और कुदरत को पहचान करके इसकी शरण में आना ही पड़ेगा।
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