तम्हारे मंदिर।
तुम धन और पावर के भूखे सिआसतदान और धर्म को धंदा बनाने वाले लोग कितने ही महंगे और कितने ही सूंदर ईटों पथरों के भविये मंदिर बनालो पर जब तक तुम अपना चरितर नहीं शुद्ध करोगे और अपने मन को भगवान के बनाए हुए इंसान के जीवन के उथान और बेहतरी के लिए अपनी सेवा नहीं अर्पण करोगे यह पोलिटिकल पावर गेन करने के बेवक्कूफी वाले यत्न फेल हो जाएंगे।
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