सरमाएदारी,पूँजी पति, गरीब किसान,मजदूर और आम जनता।
भारत की १९४७ की आजादी के बाद की सरकारों ने सिर्फ अमीरों को और अमीर बनाने के लिए ही सारे कानून घड़े हैं लेकिन गरीब किसान ,मजदूर और आम आदमी के जीवन के उथान के लिए लीपा पोची ही करती रही हैं। इस का असली कारन है कि सारे सरकारी तंत्र को नेहरू खानदान की ब्राह्मणवादी कांग्रेस सरकार के जरिये मनुवादी,हिन्दुत्वादी ब्राह्मणों ने काबिज कर रखा है। सारे सरकारी डिपार्टमेंट्स के चीफज आरएसएस के ही मेंबर हैं। इन ब्राह्मणों की जन संख्या भारत की जन संख्या का सिर्फ ३-४ % ही है। वास्तव में भारत में यह आरएसएस के मनुवादी,हिन्दुत्वादी ब्राह्मण ही १९४७ के बाद भारत पर राज कर रहे हैं जो कि गरीबों को गरीब ही रखना चाहते हैं और अमीरों को और अमीर बनाना चाहते हैं। जब तक भारत देश से इन आरएसएस के लोगों की मालकियत को ख़तम नहीं किया जाएगा,देश में कोई भी नई व्यवस्था काम नहीं क्र पाएगी। यह तो अब आरएसएस और बीजेपी की मोदी सरकार के १९१४ से आने के बाद हमने देख ही लिया है कि इन की सरकार भारत के लिए कितनी हानिकारक सिद्ध हुई है। इस हानिकारक सरकार को विदा करने के लिए इस देश वियापी आंदोलन को मजबूत करने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सभी गरीब ,किसान,मजदूर,छोटे बुसिनेसस्मेन और आम आदमी को अपने धरम और जाती से ऊपर उठ कर एक साथ इस देश वियापी परिवर्तन लाने वाले संघर्ष का हिस्सा बनना चाहिए।
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