भगवान कहाँ है ?
मुझ को कहाँ ढूंढे रे बन्दे,में तो तेरे और सभ जीवों के अंदर में,
ना रहता किसी मस्जिद,गुरुदवारे ,चर्च और मंदिर में।
ना रहता में हरी दवारे ना रहता में काशी में ,
मेरा वास तो है सिर्फ जन सेवा, प्रेम,आनंद और शान्ति में।
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