जीवन किया है ?
जीवन उड़ रही बादलों की भाफ का जमीन पर सिमट कर बारिश का पानी बन जाना है,
ऊपर से हवा और गैसों का आ कर पानी पर बैठ जाना है और धुप की रौशनी में चमक जाना है।
सारा जीवन भोजन को स्वासों से जला कर गर्मी बन जाना और बेकार तत्वों को बाहर निकालने का ही सिलसिला है,
अंत मैं जमीन के बने शरीर से पानी और हवा और गैसों का अलग हो कर, उड़ कर आस्मां के अट्मॉस्फेर सागर में मिल जाना और एक हो जाना है।
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