बदलता हुआ वकत।
जब आसमान के उड़ते बादल जमीन पर पानी बन कर उतर आएँगे,
सभ अँधेरा नष्ट हो जाएगा और आकाश के जलते हुए सितारे चमक जाएंगे।
नीला आकाश फिर हमें अपने प्रेम से निहार रहा होगा और और चेतना के फूल खिल जाएंगे,
अँधेरे तेरे भी दिन अब जाने वाले हैं ,कब तक यह आकाशों के मासूम तारे रोते जाएंगे ।
इतना गुमान ना कर अपनी इस षड आंतरकारी और पापों से भरी किस्मत पर, यह चंद दिनों का खेल है ,
जो फूल कभी अपनी ऊंची हवाओं की चरम सीमा पर मचलते नज़र आते थे , हम ने उन्हें भी मुरझाते और झड़ते देखा है।
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