नफरत।
नफरत के बीज बोने वालों,सिखाने वालों,करने वालों और कराने वालों की ,
इस दिनिया में अब कोई जरूरत नहीं है,इन को खुद ही विदा ले लेनी चाहिए।
बहुत हो चूका है ,पानी सर से ऊपर निकल चूका है,अब कोई बुद्धि की बात होनी चाहिए,
अगर इन की बुद्धि यह मानने को तैयार नहीं है, इन को हर तरह से आखरी सलाम देनी चाहिए।
अहिंसा परमो धर्मा मानने वालों का ही इस पृथ्वी पर रहने का हक़ है ,
हिंसा करने और कराने वालों को विदा ले लेनी चाहिए,दूसरों को सुख चैन से रहने देना चाहिए।
युद्ध के औज़ारों का वियोपार करने वालों के लिए ही यह युद्धों की दुनिया मार्किट है ,
इन वियोपारियों की बुद्धि में ही विश्व शान्ति के लिए,यह परिवर्तन आना चाहिए।
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