इंसानियत और धरम।
धर्मों के नाम पर इंसानियत को बांटने वाले तुम कौन हो ?
तुम्हें जीवन देने वाली कुदरत तो एक ही है तुम कहाँ खो गए हो ?
लगता है तुम्हारी चेतना होश में नहीं है तुम अभी भी सो रहे हो,
उठ जाग इस बेहोशी से सवेरा हो गया है तुम अभी भी सो रहे हो।
लोगों का जीवन संवारना,इनके दुखों को निवारणा तेरा पहला काम था,
तुम इनको लड़ा कर,अपना नाम जपाने और अपने ऐशो आराम में गलतान हो गए हो ।
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