ओ दुनिया के इंसान।
ओ दुनिया के इंसान ,तू कियूं बन गया है शैतान ?
तूने भुला दिया अपना ईमान और बन गया सभ से बड़ा बेईमान।
तूने कुदरत और असिस्तव को कर लिया अपना ही दुश्मन ,
बुद्धि तेरी गुम हो गई है, और तू रटे जा रहा शिव और हनुमान।
झुकना पड़ेगा तुझे इस कुदरत और असिस्तव के आगे,
नहीं तो समझले तेरे अहंकार का अंत हो गया है तमाम।
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