दुःख और सुख।
दुःख और सुख हमारे अंदर की गंदगी और शुद्धि और अपने मन के भटकाव और टिकाओ की वजा से हैं। अंदर की शुद्धि और अपने मन के टिकाओ के बगैर हम सुख,आनंद /वैलनेस को जिस को बोपारियों ने परमात्मा/वाहेगुरु/भग्वान समझ रखा है नहीं पा सकते हैं।
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