हमारा मन और इसकी जुगती।
हमारा मन हमारी ही आग का शिव लिंग है और हवन है, तो हमारी आत्मा पानी की ठडक है,शान्ति है और बुद्धिमानी है ,
अपनी इस मन की आग को कैसे काबू पाया जाए और बुझाया जाए, यही जुगती सभी गियानियों और सिद्ध पुरषों ने जानी है।
धरम वही है, जिस की सारी शिक्षा इसी जुगती के इर्द गिरद घूमती है,यही जुगती कैसे पानी है ?
बाकी तो सभ पाखण्ड है , सभी एक दुसरे को मूरख बनाने में लगे हुए हैं,यह दुनिया बहुत बड़ा धोखा है और फानी है।
यही मन की आग ब्लड प्रेशर है,हाइपरटेंशन है,हार्ट अटैक है,शुगर है,अनेक रोगों का घर है ,
इस को खुद कन्ट्रोल,रेगुलेट करे बिना सर्व नाश है,सभी दुखों का घर है,ना समझी है और सभ से बड़ी मूर्खता है।
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