Monday, August 22, 2022

KUDRAT AUR ASISTAV.

कुदरत और असिस्तव्। 
हम सभ,हर वकत, शक्ति रूपा कुदरत और  असिस्तव में रहते हुए भी उस को इस लिए जानते पहचानते  नहीं हैं कियुँकि वह हमारी आँखों से दिखाई नहीं पड़ता,और उसकी कोई एक शकल नहीं है,हमारी कल्पना से वह जैसा हम चाहें उसे देख सकते है। हिन्दू धरम सारा अनंत  कल्पनाओं से भरा पड़ा है। वह तो  शक्ति रूपा है जैसे हवा, गेस्सेज   सब अटॉमिक पार्टिकल्ज,क्वांटम फिजिक्स, धुआं,बादल,सर्दी,गर्मी,बिजली,गर्जना ,बारिश,बर्फ, रौशनी आदि । सिर्फ उसकी होंद हमें , महक,सवाद,सर्दी,गर्मी,आराम,तंदरुस्ती,आनंद, धवनि, चमक और तरंगों के रूप में  ही महसूस होती है ।

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