मन की विरोधी धाराएं।
आसान शब्दों में, धरती और आकाश के बीच,दिन और रात , जो पानी के बादलों और गैसेज की गरम और ठंडी धाराएं धरती से आकाश और आकाश से धरती की तरफ,उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर,पूरब से पच्छम और पच्छम से पूरब की और बहती हैं,यही हमारा मन है या सूख्श्म शरीर है। यही धाराएं हमारी ख़ुशी,हंसी,गमी और कई तरह के मूड बनाती हैं। इन्हीं धाराओं को साइंस क्वांटम एनर्जी से नाम देती है है और धरम इनको मन/आत्मा कहता है। बात सारी समझने की है ,बाकी बहस और लड़ाई तो सिर्फ लैंग्वेज और शब्दों की बे समझी की है।
No comments:
Post a Comment