जो बाहर है, वही तेरे अंदर है ।
जो बाहर है,वही तेरे अंदर है ,
जो बाहर धरती पर अन्न है ,अंदर तेरे वही भोजन है।
बाहर तेरे जो पानी और इसके बादल हैं,वही अंदर तेरे मन और एमोशन्ज हैं,
बाहर तेरे जो हवा है अंदर तेरे वही तेरा स्वास या प्राण है।
बाहर तेरे जिस सूर्य की रौशनी है ,अंदर तेरे वही तेरी आँखों की ज्योति है,तेरा धियान है,
तू किस को ढूंढ़ने में मंदिरों के चक्कर लगाता रहता है ? तुझ जेहा मूरख दुनिया में ढूंढ़ना मुश्किल है।
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