हमारा जीवन ।
हमारा जीवन भोजन की ऑक्सीडेशन से उत्पन हुई ऊषणता है ,जिसे प्राण कहते है,जिसको हम पानी से रेगुलेट करते रहते हैं। जीवन का अंत सभ से जियादा,किसी कारन से हमारे शरीर को ऑक्सीजन ना मिल पाना ही होता है। यह ऑक्सीजन हमें हर वकत हमारे नाक के दवार से स्वास दवारा अट्मॉस्फेर में से मिलता रहता है और कार्बन डाइऑक्साइड निकलता रहता है। इस ऑक्सीजन के आने और कार्बन डाइऑक्साइड के निकलते हुए स्वास के चक्कर माला का नाम ही जीवन है और इस चक्कर के किसी कारन से रुक जाने का कारन मृत्यु है। हमारे दिल को ब्लड पंप करने के लिए और सभी सेलों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए और हमारे ब्रेन और नर्वस सिस्टम को चलाने के लिए बिजली की भी जरूरत पड़ती है जो कि हमें हमारे केमिकल रिएक्शन और सूर्या की शक्ति से मिलती रहती है। वास्तव में हमारी जीवन किरिया ही भगवान् है और कोई भगवान् नहीं है,यह नाम भी इस किरिया को हम ने ही दिया है,धर्मों ने इस जीवन को अपनी अपनी भाषा के अलग अलग नाम दे कर अपना धंदा चलाया हुआ है। भगवान् के बारे में कई अटपटे सवाल भी हम जीवन धारी इंसानों ने ही पैदा किये हैं।
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