नानक।
करे करावे आपे आप ,नानक के कुछ नाहीं हाथ।
नानक जब कुदरत की शक्क्तियों का अपने शरीर के साथ कर्तव् कर रहे सम्बन्ध का विश्लेषण करते हुए निर्णा लेते हैं ,तभी कह रहे हैं कि मेरे हाथ कुछ भी नहीं है ,जो कुछ भी मेरे शरीर से हो रहा है सभ कुछ कुदरत यानी विश्व की शक्तियां कर रही हैं और करवा रही हैं। आज साइंस की नज़र से हम इन कुदरत यानी विश्व की शक्तियों को यूनिवर्सल ,इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के नाम से जानते हैं।
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