हम भारत के लोग।
हम भारत के लोग जिस दिन ईटों पथरों के मंदिरों और झूठे भगवान् की मूर्तियों की पूजा पाठ से हट कर अपने ही शरीर के प्राण और जीव आत्मा वाले सच्चे मंदिरों में धियान करने की साइंटिफिक कला को सीख जाएंगे और एक दुसरे के साथ प्रेम भाव से और सेवा भाव से रहने लगेंगे उसी दिन से भारत देश में सच्चा साइंटिफिक धरम स्थापिक होगा और नहीं तो यह हड्डी मॉस का शरीर गन्दी सियासत और झूठे और पाखंडी धर्मों की नफरत की आग में यूँ ही जलता रहेगा और आपस में लड़ मर कर अपना जीवन नष्ट करता रहेगा।
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