भगवान् कहाँ हैं ?
शरीर के बगैर भगवान् का कोई असिस्तव ही नहीं है। शरीए के बगैर कोई भी शक्ति कोई कार्य नहीं कर सकती है। इस लिए सभ जिन्दा शरीर ही भगवान् हैं। मरीतु होने के बाद शरीर और शक्ति अलग हो जाते हैं और ये अलग हुई शक्ति ही अनंत बिमारियों और कुदरती आपदाओं की शकल अख्तियार करती है। भगवान् तो जीवन का ही दूसरा नाम है जो कि शरीर=MC2 और शक्ति=E के मिलान से पैदा होता है और इन के अलग होने से मर जाता है।
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